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कुंवारी रंडी की चुत गांड चुदाई का मजा- 3
जवान रण्डी की गांड मारी मैंने … वो पहली बार मुझसे ही चुदी थी. पहली रात उसकी बुर फाड़ी तो दूसरी रात मैंने उसकी कुंवारी गांड के नाम कर दी.
नमस्कार दोस्तो, मैं रवि किशन, सेक्स कहानी के तीसरे और अंतिम भाग में आप सभी का स्वागत करता हूं.
अभी तक की सेक्स कहानी
कुंवारी लड़की की बुर की सील खोली
में आपने पढ़ा था कि किस तरह से मैंने एक कमसिन जवान लड़की रूपा को अपने घर पर बुलाया और अपनी कुंवारी लड़की को चोदने की इच्छा को पूरा किया.
अब आगे रण्डी की गांड मारी:
सुबह उठने के बाद हम लोगों ने चाय नाश्ता किया और मैंने रूपा को दर्द की दवाई दी, जिससे उसका दर्द कम हो सके.
कुछ ही देर में वो बिल्कुल नॉर्मल हो गई.
मेरा नौकर गोपू हमारे लिए खाना बना कर अपने घर चला गया था और अब मैं और रूपा फिर से अकेले थे.
दोपहर के बारह बज रहे थे और रूपा कमरे में आराम कर रही थी.
अब तक उसका दर्द बिल्कुल ठीक हो गया था.
मैं कमरे में गया और रूपा को नहाने के लिए कहा.
वो बाथरूम में चली गई.
कुछ देर बाद मैं भी अपने कपड़े उतार कर सिर्फ चड्डी में ही बाथरूम में घुस गया.
अन्दर रूपा शॉवर के नीचे सिर्फ चड्डी पहने हुए नहा रही थी.
मैंने पीछे से जाकर उसे अपनी बांहों में भर लिया.
वो पलट गई और मेरे सीने से चिपक गई.
मैंने उसकी चड्डी नीचे करते हुए उसे नंगी कर दिया और अपना लंड बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे दिया.
वो लंड को सहलाने लगी और मैं उसके जिस्म को सहलाने लगा.
जल्द ही मेरा लंड अपने पूरे जोश में आकर खड़ा हो गया.
मैं कभी उसके दूध को सहलाता, कभी उसकी गांड को दबाता.
इस बार रूपा अपने आप ही नीचे बैठ गई और उसने अपने मुँह में मेरे लंड को भर लिया.
वो बड़े प्यार से लंड चूस रही थी और उसके इस अंदाज ने मेरा मजा दोगुना कर दिया.
कुछ देर बाद मैंने उसे उठाया और उसके बदन पर शैम्पू लगाया उसने भी मेरे बदन पर शैम्पू लगाया.
हम दोनों एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे.
ऐसा करते हुए दोनों को ही मजा आ रहा था.
मैंने उसके गुप्तांगों को अच्छी तरह से साफ किया और फिर दोनों नहा कर बाहर आ गए.
बेडरूम में आकर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं उसे हर जगह चूमने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी.
जल्द ही उसकी चूत पानी से लबालब भर गई.
मैंने उसे उठाया और बिस्तर से बाहर के आया.
मैंने उसे अपने सामने खड़ा किया और उसे अपनी गोद में उठा लिया.
उसने भी मेरी गर्दन पर अपनी बांहों से पकड़ लिया.
मैंने नीचे से उसकी गांड को अपने हाथों से थाम लिया और लंड को उसकी चूत में सैट किया.
धीरे धीरे मैंने अपना लंड चूत में डाल दिया और उसकी गांड को पकड़कर आगे पीछे करने लगा.
‘आआहाह अंकल आआह आराम से.’
‘क्यों क्या हुआ?’
‘ऐसे में तो बहुत अन्दर तक घुस रहा है आआह …’
‘कुछ नहीं … बस तू मजे ले.’
मैं अपनी रफ्तार तेज करता रहा.
और वो ‘आआहा आह आआह्ह मम्मीईई ऊउफ्फ …’ करके मजे लेती रही.
मैं उसे किसी खिलौने की तरफ उछाल उछाल कर चोद रहा था.
आज तक मुझे किसी लड़की के साथ ऐसा मजा नहीं मिला था, जो मजा मुझे रूपा दे रही थी.
मैं इतनी जोर जोर से उसे उछाल रहा था कि उसकी आंखें फटी जा रही थीं.
मेरा लंड उसकी चूत की गहराई तक पहुंच रहा था.
जल्द ही वो झड़ गई और मैंने उसे पलंग के पास ले जाकर झुका दिया.
अब मैंने उसके पीछे आकर उसकी चूत में फिर से अपना लंड डाल दिया और उसकी पतली कमर को पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया.
मैं उसकी गांड को दबाता हुआ जोर जोर से चुदाई करने लगा.
मेरे धक्के उसकी गांड पर इतनी जोर जोर से पड़ रहे थे कि पूरा कमरा थप थप की आवाज से गूंज उठा.
जल्द ही मैं भी उसके अन्दर ही झड़ गया और रूपा बिस्तर पर लेट गई.
मैंने अपना लंड साफ किया और कपड़े पहन कर बाहर चला गया.
कुछ देर बाद जब मैं वापस आया तो रूपा वैसी ही नंगी लेटी आराम कर रही थी.
उसके बाद मैंने उसे खाने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया.
खाने का मन तो मेरा भी नहीं था इसलिए मैं भी उसके बगल में लेट गया.
वहीं लेटे हुए मैंने गोपू को फोन लगाया और उसे शाम को आने के लिए मना कर दिया.
उसके बाद मैंने एक बार फिर से रूपा की चुदाई की और हम दोनों ही सो गए.
शाम सात बजे तक हम दोनों सोते रहे. जब उठे तो दोनों ही बिल्कुल फ्रेश हो चुके थे.
हम दोनों ने ही 9 बजे तक खाना खा लिया और जल्द ही बेडरूम में आ गए.
रूपा जानती थी कि मैं फिर से उसकी चुदाई करने वाला हूं इसलिए वो पहले से ही चड्डी और ब्रा में हो गई.
ये हम दोनों की आखिरी रात थी और इस रात को मैं और भी हसीन बनाना चाहता था और मैं अपनी अल्मारी से व्हिस्की की एक बोतल ले आया.
सबसे पहले तो मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और रूपा को भी नंगी करके अपनी जांघों पर बैठा लिया.
मैं धीरे धीरे विस्की का पैग बना कर खुद भी पीता रहा और रूपा को भी पिलाता गया.
जल्द ही रूपा और मैं पूरे नशे में आ गए.
मैंने साउंड सिस्टम में अच्छा सा गाना शुरू किया और रूपा को नंगी नाचने के लिए कहा.
रूपा धीरे धीरे नाचने लगी.
वो किसी नागिन की तरह अपनी कमर हिलाती हुई और गांड मटकाती हुई नाचने लगी.
मैं भी उठा और उसके पास जाकर मटकने लगा.
वो भी मेरा लंड अपने हाथों में लेकर नाचने लगी.
बीच बीच में मैं उसकी गांड पर जोर से चपत लगा देता, जिससे उसके दोनों चूतड़ों में मेरी उंगलियों के निशान छप गए.
वो भी मस्ती से मेरे साथ सेक्स का मजा ले रही थी और मुझे चूमती जा रही थी.
फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और उसके बदन पर तेल डालने लगा.
वो खिलखिलाने लगी और मस्ती से अपने बदन से तेल लेकर मेरे लंड पर लगाने लगी.
उसे शायद अहसास नहीं था कि यह सब क्यों हो रहा था.
जल्द ही उसका पूरा बदन तेल से भीग गया और हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए.
उसके कोमल बदन से ऐसे चिपकने में मुझे अलग ही मजा आ रहा था.
उसने भी मेरे लंड पर बहुत सारा तेल लगाया और लंड को जोर जोर से फैंटने लगी.
मैंने भी उसकी चूत और गांड में अच्छे से तेल लगाया और उससे कहा- चल मेरी जान, अब तेरी गांड को चोदने का समय आ गया है.
ये सुनकर वो एकदम से डर गई मगर कुछ बोली नहीं.
मैं समझ गया और मैंने उसे चूमते हुए कहा- मेरी डॉल तुझे मेरे साथ मजा आया या बुरा लगा?
वो मेरे सीने से चिपकती हुई बोली- आप बहुत मस्त मर्द हैं.
मैंने उससे कहा- तो मुझ पर भरोसा रख. तुझे हर तरफ से परफेक्ट करके ही भेजूँगा.
वो हंस दी और बेख़ौफ़ हो गई.
अब मैंने उसे उठाया और बिस्तर पर औंधा लिटा दिया.
मैं उसके ऊपर चढ़ गया और अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को फैलाया.
उसका छोटा सा गुलाबी रंग का छेद मेरे सामने लुपलुप कर रहा था.
मैंने तेल की शीशी उठाई और उस रण्डी की गांड के छेद में तेल भरने लगा.
उसने अपनी गांड खोल दी और मैंने उंगली गांड के अन्दर डालकर उसकी गांड को चिकना और ढीला कर दिया.
फिर मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी गांड के छेद में लगा दिया.
मैं रूपा के ऊपर लेट गया और अपने शरीर के वजन से उसे दबा लिया.
मैंने अब लंड पर दबाव देना शुरू किया और जैसे ही मेरा सुपारा छेद को खोलने लगा, रूपा कसमसाने लगी.
वो बोली- अंकल यार, उधर मत करो, वहां से नहीं जाएगा … प्लीज अंकल वहां से रहने दो, आगे से ले लो.
मैंने कहा- कल तेरा आगे का छेद भी छोटा सा था न … मगर आज तू खुद से आगे से करने की कह रही है. मेरी जान तू बस मुझे करने दे … तेरा पीछे वाला छेद भी तुझे मजा देने लगेगा.
वो शांत हो गई.
उसकी गांड का छेद सच में बहुत ही छोटा सा था लेकिन लंड और गांड में तेल लगने के कारण से मेरा लंड अन्दर जा रहा था.
जल्द ही मेरा सुपारा गांड के छेद के पहले छल्ले को फैला कर अन्दर चला गया.
रूपा चिल्लाने लगी- आआहह आआह्ह मम्मीईई आआह … मत करिए प्लीज अंकल मत करिए.
लेकिन मैं कहां मानने वाला था.
धीरे धीरे करते हुए मैंने अपना मूसल जैसा लंड उसकी नन्हीं सी गांड में जड़ तक पेल दिया.
मेरे वजनी शरीर के नीचे दबी हुई रूपा हिल भी नहीं पा रही थी.
जल्द ही मैंने तेल टपकाते हुए आहिस्ते आहिस्ते लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
उसकी गांड इतनी ज्यादा टाइट थी कि मेरा सुपाड़ा छिल चुका था और मुझे तेज जलन हो रही थी.
मगर मैं लगा रहा.
मैं अपनी गांड में लंड चलाने की रफ्तार को तेज करता रहा.
रूपा मेरे नीचे दबी जोर जोर से चिल्लाती रही.
मेरे तेज धक्के उसके चूतड़ों पर चट चट पड़ने लगे.
करीब दस मिनट बाद रूपा शांत हो गई और मेरा लंड बड़े प्यार से उसकी गांड में आने जाने लगा.
अब मैंने उसे घुटनों पर लाते हुए घोड़ी बना दिया और उसके चूतड़ों को पकड़ कर तेज तेज धक्के मारने लगा.
कुछ देर के लिए मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला.
उसका छेद मेरे लंड जितना चौड़ा हो गया था और खुला का खुला था.
मैंने एक नीट पैग बनाया और रूपा के मुँह से लगा दिया. शायद उसे इस वक्त शराब की सख्त जरूरत थी.
मैंने उसे पिलाया तो उसने एक सांस में ही पी तो लिया, मगर व्हिस्की की कड़वाहट उसे कुछ तेज सी लगी.
वो नमकीन मांगने लगी मगर मैंने इसे चखना खाने नहीं दिया.
इससे उसके साथ दो बातें हुईं. एक तो वो गांड का दर्द भूल गई और शराब की कड़वाहट से मुँह बनाने लगी.
जल्द ही उसे शराब मजा देने लगी और मैंने उसी वक्त फिर से लंड गांड में पेल दिया.
इस बार लंड आसानी से घुस गया था, तो मैं पूरी ताकत से गांड मारने लगा और चट चट की आवाज के साथ उसकी चुदाई करने लगा.
फिर मैं कभी उसकी गांड में, तो कभी उसकी चूत में अपना लंड डालता रहा.
रूपा घोड़ी बनी हुई मेरे लंड को झेलती रही.
हम दोनों ही शराब के नशे में चूर थे और दोनों का पानी नहीं निकल रहा था.
करीब आधा घंटे तक मैंने उसकी धुंआधार चुदाई की.
उसके बाद पहले रूपा ने अपना पानी छोड़ दिया और उसके बाद मैं भी उसके अन्दर ही झड़ गया.
अब मेरी दिल की इच्छा पूरी हो चुकी थी मैंने एक कुंवारी लड़की की चूत और गांड दोनों की चुदाई कर ली थी.
उस रात मैंने रूपा को चार बार चोदा था जिससे हम दोनों
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ही बुरी तरह से थक चुके थे.
सुबह होते ही हम दोनों तैयार हो गए और करीब दस बजे रूपा का एजेंट उसे लेने के लिए आ गया.
मैंने रूपा को उसके सारे पैसे दिए और वो दोनों चले गए.
इसके बाद अगले हफ्ते मैंने किसी लड़की को चोदने के लिए नहीं बुलाया.
उसके बाद मैंने रूपा को फिर से दो दिन के लिए अपने पास बुलाया और मैंने उसकी चुदाई की.
वो मुझसे बड़ी खुश थी. आते ही मेरे सीने से ऐसे लग गई जैसे मैं उसका खोया हुआ प्यार होऊं.
मैंने उससे कहा- क्या हुआ रूपा, बड़ी खुश दिख रही है?
वो मुझे चूमती रही और बताती रही कि इस बीच उसकी चार लोगों ने चोदा था, मगर उसे आपके प्यार से चोदने की अदा बेहद भा गई थी.
इस बार मुझे केवल दस हजार रुपए ही देने पड़े.
अब रूपा ने मुझे अपना पर्सनल नंबर दे दिया, जिससे मैं कभी भी उसे अपने पास बुला सकता था.
इसका फायदा मुझे ये हुआ कि अब मुझे एजेंट को फोन नहीं करना पड़ता था और रूपा ने अपनी दो सहेलियों को भी मेरे पास भेज दिया.
उसकी वो सहेलियां उसके जैसी कुंवारी नहीं थीं, मगर माल थीं.
अब तक रूपा और मैं कई बार मिल चुके हैं और अब वो चुदाई के खेल में एक अच्छी खिलाड़ी बन गई हैं.
दोस्तो, उम्मीद करता हूं कि मेरी ये रण्डी की गांड की सेक्स कहानी आप सभी लोगों को पसंद आएगी.
कोमल मिश्रा जी को दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने मेरी कहानी भेजने में मेरी मदद की.
धन्यवाद.




















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